लिक्खा करे हैं ..तुम्हे रोज ही मगर... ख्वाहीशोन कें खत तुम्हें भेजेही नही,,,,,, एनक लगाके कभी पढनां वो चिठीया.. पल्कोन्के पानीमें रखना वो चिठीया,....तैरती नजर आयेगी जनाब.....

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